Story behind the story
आज किसी स्टोरी के लिए बाहर रिपोर्टिंग नहीं की, लेकिन क्योंकि हम रिपोर्टर हैं तो बाहर जाएं न जाएं कहीं न कहीं कुछ ना कुछ ऐसा ऑबसर्व कर लेते हैं जिसे अपने अनुभव के साथ जोड़ पाते हैं। हमारी छुट्टी का दिन भी हमारा नहीं होता। सुबह उठने से लेकर रात तक जहां भी जाएं जो भी करें हमारी नजरें औरों से अलग होती है। मैंने महसूस किया हम जहां भी जाएं जो भी करें हर वक्त हम स्टोरी ढूंढते हैं। मतलब ये नहीं हम इंज्वाय नहीं करते मतलब ये है की हमारी सोच दूर तक जाती है।
हम वो चीज तो कर लेते हैं लेकिन बाद में उसपर गहन चिंतन करते हैं। हम अपने आस -पास लोगों को बाजार को, माहौल को, चीजों को बहुत ध्यान से देखते हैं। उसमें छिपी कहानी और गहराई तलाशते हैं और खुद को जोड़ते हैं। मैं कभी मैं सोचकर बात नहीं लिखती मैं हमेशा हमारी पत्रकार दोस्तों के अनुभव को कुछ इस तरह ही होते हैं ये सोचकर लिखती हूं। आज भी पूरे दिन कहानी के पीछे की कहानी को ढूंढते हए दिन निकल गया


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