Story behind the story
रोजाना खबरों के लिए सरकारी दफ्तर और मंत्रालय के चक्कर लगाने पडते हैं, खबरों की पुष्टि के लिए उनके पीछे घूमना पड़ता है। स्टोरी के लिए उनके वर्जन चाहिए होता है और इसके लिए हम चक्कर लगाते रहते हैं। मंत्रालय में अधिकारियों के साथ बैठते हैं। इस दौरान जो सबसे ज्यादा नोटिस किया मैंने वो ये है कि इनके पास कोई काम नहीं होता। ये जुमला जो हम कहते हैं कि सरकारी नौकरी 10-6, एक मिनट इधर उधर नहीं। बीच में चाय और कभी कभी तो बस हाजिरी नो काम। एसी के कमरे में बैठकर हाथ में मोबाइल पर गेम, या तो सिस्टम पर कुछ कुछ या बस अगर कैबिन में दो चार लोग हैं तो सारे बस एक दूसरे से लगे हैं।
ये बहुत ही आम नजारा है। मैं आपको इसके अंदर और भी बताती हूं, क्योंकि रोज इनको देखती हूं, हम धूप में घूमते रहते हैं खबरों के लिए यही नहीं बाहर ट्रैफिक पुलिस और बाकी कई लोग धूप में भटकते हैं, लेकिन ये लोग अच्छी तनख्वा पाते हैं, मुझे इस बात से गम नहीं लेकिन आप काम भी करो। एक तो इतने स्टाफ की जरूरत होती नहीं, फिर भी भर भर के एक अधिकारी के पीछे 5 स्टाफ बस अंदर से बाहर करते हैं और फाइल का नाटक करते हैं। दूसरे लोगों के पास जिन्हें जरूरत है उनके पास काम नहीं। ये लोग मुफ्त में नौकरी पर बैठे हैं और बस पैसे लेते हैं। सबको पता है कितना काम करते हैं।
बड़े से छोटे सब लोग, जो नीचे बैठे हैं वो भी और जो उपर कुर्सी में हैं वो भी। इनके कमरे देखेंगे तो चौंक जाएंगे आप। एसी फ्रीज, खाने का सामान, कुर्सी, सोफा, मेज माशा अल्लाह। जो बाहर बैठा है वो भी एसी में और केबिन के अंदर एक पूरी किचन बनी हुई है। लगता है एक कमरा पूरा घर है किसी का। सरकारी खजाने को मत बर्बाद करो ऐसे मेरे दोस्तों।


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