रेखा : एक छोटी सी पहेली..
एक छोटी सी कहानी जिसे हर कोई जानना चाहता है,एक छोटा सा नाम रेखा, जिसे हर कोई समझना चाहता है। रेखा आज भी लोगों के लिए एक पहेली बनी हुई है... बेबी भानुरेखा के नाम से चार साल की उम्र में कैमरे से रिश्ता जोड़ने वालीं रेखा की जिंदगी के संघर्ष और सफलता की कहानी किसी रोचक दास्तां से कम नहीं है...दक्षिण भारतीय फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर अभिनय यात्रा की शुरुआत करने वालीं रेखा ने 1970 में हिंदी फिल्मों में कदम रखा, तो पहली फिल्म सावन भादों में उनके जलवे चर्चा में आए, लेकिन उनकी शुरुआती फिल्मों से उनको पहचान नहीं मिली... बतौर अभिनेत्री रेखा की पहचान अमिताभ बच्चन की नायिका बनने के साथ शुरु हुई, जब उन्होंने पहली बार फिल्म आलाप में अमिताभ के साथ काम किया...
प्रकाश मेहरा की मुकद्दर का सिकंदर में रेखा और अमिताभ की जोड़ी ने पहली बार शोहरत के आसमान को छुआ और फिर देखते ही देखते यह जोड़ी सिने-इतिहास में अपना नाम दर्ज करती चली गई... सुहाग, मि.नटवरलाल सहित कई फिल्मों की सफलता के साथ इस जोड़ी ने बुलंदी का वह शिखर छुआ, जिसे आज भी लोकप्रियता का इतिहास माना जाता है...इस जोड़ी का शिखर रहा यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला, जिसमें अमिताभ के साथ रेखा और जया बच्चन का त्रिकोण था...फिल्म में जया ने अमिताभ की पत्नी और रेखा ने प्रेमिका का रोल किया था...यही वजह है कि इस फिल्म को बच्चन की निजी जिंदगी से जोड़कर देखा गया और इस जोड़ी के आपसी रिश्तों को लेकर चर्चाओं का बाजार आज भी बुलंद रहता है...
अमिताभ-रेखा की जुगलबंदी
इस जोड़ी के दीवाने तो आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि यह जोड़ी एक बार फिर सफलता के इतिहास को दोहराए...इसमें कोई शक नहीं है कि जिस दिन अमिताभ-रेखा एक फिल्म में साथ काम करने के लिए राजी हो गए, वह फिल्म दर्शकों के हुजूम को थिएटरों में ले आएगी...बच्चन से हटकर रेखा के कैरियर में उमराव जान एक नया मोड़ साबित हुई, जिसमें रेखा ने अदायगी का जादू बिखेरा.,...इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना रेखा की अभिनय क्षमता का प्रमाण था... उमराव जान के बाद रेखा के कैरियर में मंदी जरुर आई, लेकिन निजी तौर पर फिल्म-जगत में उनका जादू अब भी बरकरार है...आज भी बड़े से बड़े निर्देशक उनके साथ काम करने को उत्सुक रहते हैं...
हाल ही में परिणीता के गाने की सफलता से साबित हो गया कि 4 दशक बाद भी रेखा का जादू बरकरार है...ऐसे में, जबकि रेखा की समकालीन अधिकतर अभिनेत्रियां या तो रिटायर हो चुकी हैं, या फिर मां-दादी के रोल कर रही हैं, आज भी रेखा की क्षमता हमेशा दिलचस्पी का सबब बनी हुई है और शायद हमेशा बनी रहे....
खुद को भगवान की सबसे प्यारी संतान मानने वाली रेखा की जिंदगी हमेशा रहस्यों में कैद रही। अमिताभ के साथ सफलता और प्रेम के रिश्तों ने रेखा की जिंदगी को नई दिशा दी और आज भी इस जोड़ी को बेजोड़ कहा जाता है। खूबसूरती की मिसाल कहीं जाने वाली रेखा की निजी जिंदगी की उठापटक भी हमेशा चर्चित रही। अमिताभ के अलावा कई सितारों के साथ उनके अफेयर के किस्से, 1990 में दिल्ली के बिजनेसमैन मुकेश अग्रवाल के साथ उनके विवाह की असफलता रेखा के रहस्यों का एक हिस्सा हैं। लोगों को चौंकाने में विश्वास रखने वाली रेखा कब क्या करें और कहे, कोई नहीं जानता। रेखा अदभुत हैं और शब्दों से पार उनका एक ऐसा संसार है, जिसके रहस्य कोई नहीं जान सकता, सिवाय रेखा के..
प्रमुख फिल्में :
वर्ष फिल्म किरदार
1966 रंगुला रत्नम (तमिल) बेबी भानुशाली
1970 सावन भादो चंदा
1971 हसीनों का देवता सुनीता
1971 ऐलान माला
1972 जमीन-आसमान कल्पना
1972 रामपुर का लक्ष्मण-
1972 गोरा और काला- फुलवा
1972 गाव हमारा शहर तुम्हारा-
1972 दो यार-
1972 डबल क्रास- रेखा
1973 मेहमान- शीला
1973 कीमत- सुधा
1973 कहानी किस्मत की- रेखा
1973 बरखा बहार-
1973 अनोखी अदा- नीना
1973 नमक हराम- श्यामा
1974 प्राण जाए पर वचन न जाए- शीतल
1974 दुनिया का मेला-
1975 कहते हैं मुझको राजा-रानी
1975 धर्मात्मा- अनु
1975 आक्रमण-शीतल
1976 दो अनजाने-सुनीता
1976 आज का महात्मा- माला
1977 आलाप- सुनीता
1977 रामभरोसे- मीना
1977 एक ही रास्ता- रीना
1977 आपकी खातिर- सरिता
1977 चक्कर पे चक्कर- शैला साहनी
1977 ईमान धर्म- दुर्गा
1977 खून पसीना- चंदा
1978 रामकसम- पुष्पा
1978 परमात्मा- दीपा
1978 कर्मयोगी- रेखा
1978 दिल और दीवार- रेश्मा
1978 भोलाभाला- चंपा
1978 गंगा की सौगंध- धनिया
1978 घर- आरती
1978 दो मुसाफिर- बिजली
1978 मुकद्दर का सिकंदर- जोहरा
1979 मि.नटवरलाल- शन्नो
1979 जानी दुश्मन- चंपा
1979 प्रेम-बंधन- 1979 कर्तव्य- रीना
1979 सुहाग - बसंती
1979 दो शिकारी- सुनीता
1980 राम बलराम- शोभा
1980 खूबसूरत- मंजू
1980 कलयुग- सुप्रिया
1980 ज्योति बने च्वाला- शारदा
1980 जुदाई - गौरी
1980 काली घटा- रश्मि
1980 एग्रीमेंट- माला
1980 जलमहल-
1980 नीयत -
1980 आचल- तुलसी
1981 उमराव जान- उमराव
1981 चेहरे पे चेहरा- डेजी
1981 खून और पानी-
1981 मंगल सूत्र-
1981 दासी-
1981 सिलसिला- चादनी
1981 बसेरा- पूर्णिमा
1981 एक ही भूल- साधना
1982 विजेता- नीलिमा
1982 मेहंदी रंग लाएगी-
1982 गजब- जमुना
1982 दीदार-ए-यार- हुस्ना
1982 जीवनधारा- संगीता
1982 रास्ते प्यार के- मीना
1982 अपना बना लो- रूपा
1983 प्रेम तपस्या- बेला
1983 अगर तुम न होते- नैना
1983 मुझे इंसाफ चाहिए- प्रिया
1983 उत्सव - वसंत सेना
1984 माटी मागे खून- सुजाता
1984 आशा च्योति- च्योति
1984 बाजी - आशा
1984 जमीन आसमान- नेहा
1984 झूठा सच-
1984 राम तेरे कितने नाम- राधा
1985 फासले- माया
1985 निशान-
1985 झूठी- कल्पना
1986 सदा सुहागन- लक्ष्मी
1986 जाल- सायरा
1986 इंसाफ की आवाज-
1986 लाकेट - शालू
1986 जाबाज- सोनू
1987 प्यार की जीत- सोनी
1987 इजाजत- सुधा
1987 अपने-अपने- शारदा
1987 संसार - उमा
1988 खून भरी माग- आरती
1988 बीवी हो तो ऐसी- शालू
1989 क्लर्क- सोनिया
1989 लड़ाई- माला
1989 भ्रष्टाचार- भैरवी
1989 बहुरानी- मालती
1990 शेषनाग-
1990 मेरा पति सिर्फ मेरा है- शारदा
1990 आजाद देश के गुलाम- भारती
1990 आग का दरिया-
1990 सौतन की बेटी- राधा
1990 अमीरी गरीबी- सोना
1991 ये आग कब बुझेगी-
1991 फूल बने अंगारे- नम्रता
1992 इंसाफ की देवी-
1993 गीताजलि-
1994 मैडम एक्स- सोनू
1995 निशाना-
1995 अब इंसाफ होगा-
1996 औरत औरत औरत- सीता
1996 खिलाड़ियों का खिलाड़ी- माया
1996 कामसूत्र- रासा देवी
1997 आस्था- मानसी
1997 उड़ान - वर्षा
1998 किला - यामिनी
1999 मदर- आशा
2000 बुलंदी- लक्ष्मी
2001 जुबैदा- महारानी मंदिरा देवी
2001 सेंसर- मिसेज श्रीवास्तव
2001 मुझे मेरी बीवी से बचाओ- कामिनी
2001 लच्जा - रामदुलारी
2002 दिल है तुम्हारा- सरिता
2003 भूत- सरिता
2003 कोई मिल गया- सोनिया
2005 बचके रहने रे बाबा- रुक्मणि
2005 परिणीता
2006 कृष


Great Rekha Ji
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