#WednesdayThought : समय के निकल जाने से पहले रिश्तों को समय दें..
आज की युवा पीढ़ी के पास अवसर और साधन बहुत हैं, लेकिन जीवन की व्यस्तता में रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है। मोबाइल और सोशल मीडिया ने दूर बैठे लोगों से जुड़ना आसान तो कर दिया है, लेकिन घर के लोगों को दूर कर दिया है। रिश्ते अब बस एक व्हाट्स एप मैसेज या फिर रील के लाइक तक ही सीमित होकर रह गए हैं। माता-पिता को बस रात को एक काल करके पूछ लिया जाता है कि कैसे हैं, सब ठीक ठाक? बहन भाई को काल करने के लिए तो रविवार का इंतजार करना पड़ता है। जब एक आद काल निपटा लिए जाते हैं। ऐसे लगता है जैसे कुछ काम पेंडिंग है। अरे ये काम नहीं, दिलों के रिश्ते हैं, जिन्हें व्यस्तता और फुर्सत दोनों में ही याद रखा जाता है। इनके लिए समय का इंतजार नहीं किया जाता । मेरे दोस्त की मां हैं वे अपने बेटे के मुंह से मां सुनने के लिए तरस जाती हैं। ऊपर से बेटा कभी फोन करता है तो कहता है कि आप कौन सा काल करती हैं। मैं तो बीजी हूं आपके पास तो टाइम है ना। मां बस चुपके से आंसू गिराती है और कहती है हां तुम ठीक कहते हो। मैं ध्यान रखूंगी इस बात का। हद ही हो गई है। जिनकी वजह से हम आज जिंदा हैं उनसे बात करने के लिए समय नहीं है तो...

