#SaturdayThought: आईए मिलते हैं जिंदगी से......
क्या जिंदगी इसी को कहते हैं ? मुझे नहीं पता। हा पता है तो बस इतना कि जिंदगी रोज हराती है और रोज जीत भी दिलाती है। कभी किसी बड़े गम से मिलाती है तो दूजे ही पल टूटे दिल को जोड़ने के लिए एक छोटी सी खुशी दामन में डाल देती है। जानते हैं क्यों ? ताकि हम जी लें। मर सकते नहीं क्योंकि जीवन एक है और हारकर जीना मुश्किल है। इसलिए ये सिलसिला रोजाना ऐसे ही जीवन के साथ चलता रहता है। एक पल धूप तो दूसरे ही पल छांव, कल रोना आया था, आज आंसूं ही नहीं आते, कल कुछ पलों को जी रहे थे, आज वे बस यादें हैं, जहन में जिंदा हैं। हर चीज बदलती रहती है फिर भी कुछ चीजें वहीं रहती हैं, उनकी जगह नहीं बदलती। हर चार छह महीने में मेरा कमरा बदलता गया, लेकिन डायरी में लिखे वो पन्ने, वो वातें, वो लोग, वो भावनाएं वहीं रही। उनकी जगह नहीं बदली। मैं रोज बदलती गई, समय के साथ-साथ मेरी सोच अलग होती गई। रोज गलतियां करती गईं और सीखती गई। रोज रिश्ते बदलते गए, रोजाना नए लोग मिलते चले गए, कुछ आए कुछ गए। लोगों के लिए जज्बातों में भी बदलाव होता गया, एक पल ये सोचा तो दूजे ही पल जीवन को अलग नजरिए से देखना का आनंद मिला। ये नहीं पता कि म...


