Story behind the story


कई बार एक पत्रकार ये तय नहीं कर पाता है कि उसे कौन सी खबर को प्राइरिटी देनी चाहिए,मतलब जो चलेगी टीवी पर अच्छी या जो बड़ी खबर है या वो जो उसे संतुष्ट करती हो एक पत्रकार के रूप में या वो खबर जो सभी मीडिया कवर कर रही है। कल की घटना बताती हूं कि योगा डे पर हर कोई बड़े मंत्री सेलेब्रिटीज के योगा इवेंट करने में व्यस्त थे।  मैंने अपने एडिटर से पहली शाम पूछा कि मेरे पास कई इवेंट हैं मंत्रियों की सूची है कौन कहां जाएगा, लेकिन मैं दिव्यांगों के योगा कार्यक्रम में जाना चाहती हूं। उन्होंने कहा मेरे लिए ये प्राइरिटी नहीं है तुम क्या ये सब। कल पियूष गोयल है सुबह पहले उसे कर लो। 

मैं कुछ देर भी नहीं ठहरी और  कहा सर पियूष को सब करेंगे और एजेंसी से हम ले सकते हैं फीड और बाइट। मुझे यहां जाना है मैं कुछ अच्छे विज्युल कर लूंगी। उन्होंने मना नहीं किया करते भी नहीं है मुझे ज्यादातर। लेकिन कहा देख लो मुझे इसकी जरूरत नहीं है।  मैं गई और मैंने काम किया। मुझे अच्छा लगा वहां ज्यादा मीडिया नहीं था लेकिन उनके जज्बे और ऐसी प्रेरणादायक स्टोरी करके एक सुकून मिलता है। बस यही है। 

पूरे दिन हर कहीं मंत्री और सेलेब्रिटीज के योगा चल रहे थे लेकिन ये अलग था प्रेरणादायक था, दिव्यांग बोल नहीं सकते कोई सुन नहीं सकता, पैर हाथ नहीं है लेकिन हिम्मत और जज्बा देखो व्हील पर योगा किया शानदार। आज सुबह अखबार में पियूष गोयल की फोटो और ज्यादारत मीडिया में नोएडा में 6 बजे हुए पियूष गोयल के योगा को ही दिखाया गया। फोटो के साथ कॉपी भी थी लेकिन कहीं भी दिव्यांगों के योगा की कोई चर्चा नहीं थी। बहुत कसमकस है।

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