Stop Acid Attack: एक पीड़ित औरत को देखकर ही दूसरी को मिलती है हिम्मत, ये एक थेरेपी है- Survivor

Women's Day: महिला दिवस पर हम समाज के अलग अलग क्षेत्र में अपना नाम ऊंचा करने वाली महिलाओं की मिसाल देते हैं, उनसे बातचीत करते हैं, जिन्होंने सफलता का मुकाम हासिल किया है. लेकिन समाज की कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जिनका जीवन ही अपने आप में सबके लिए प्रेरणा है, वे महिला हैं और अपने अस्तित्व को खोकर भी गर्व से जी रही हैं, यही उनको सबसे अलग बनाता है. हम एसिड अटैक सर्वाइवर की बात कर रहे हैं, जिन्होंने अपना चेहरा, अपना अस्तित्व दोनों खो दिया फिर भी सर उठाकर इस कठोर दुनिया में एक मुकाम हासिल करके जिंदगी को जिंदा रख रही हैं. वे अपने आप में ही एक मिसाल हैं.

एक दिन आप हमारे पैर छूते हैं, हमें सम्मान देते हैं, सिर पर बिठाते हैं और दूसरे ही दिन हमें दरकिनार कर देते हैं, हमें दुदकारते हैं. हमारे चेहरे को देखकर घिन करते हैं, ये है आपका सम्मान. ये है आपकी दोघली सोच. एक दिन जीने की उम्मीद देते हैं और दूसरे ही दिन मरने को मजबूर कर देते हैं. नहीं चाहिए हमें ऐसा सम्मान, नहीं चाहिए आपका तब्बजो. हमें एक दिन नहीं बल्कि हर रोज थोड़ा थोड़ा जीना है. हमें रोज महिला दिवस मनाना है, एक दिन नहीं. ये दर्द एसिड सर्वाइवर अंशु का है. बिजनौर की रहने वाली अंशु का मानना है कि सिर्फ दिखावे के लिए नहीं रियल लाइफ में महिलाओं को सम्मान मिले. महिला दिवस के मौके पर विधान न्यूज ने ऐसी ही कुछ एसिड महिला सर्वाइवर से बात की और उनके संघर्ष से जुड़ी प्रेरणाओं पर रोशनी डाली.

ऐसी ही एक सर्वाइवर रोहतक की ऋतु ने एक बहुत ही प्रेरणादायी बात कही. ऋतु ने खूब कहा कि एक इंसान ही इंसान के लिए प्रेरणा बन सकता है. ये एक थेरेपी की तरह काम करता है, जब आप किसी और को अपने ही जैसे हालातों से लड़ते देखते हैं, तो आपके अंदर भी वो ताकत अपने आप ही आ जाती है. जब मैंने देखा कि इस संघर्ष में मैं अकेले नहीं चल रही हूं, हर कोई इस जंग में जीतने की कोशिश कर रही हैं, तो मुझमें हिम्मत आ गई. डॉक्टर, इलाज, लोगों की मदद से ज्यादा से हम एसिड सर्वाइवर एक दूसरे की मदद से आगे बढते हैं. ऋति स्टॉप एसिड अटैक के छांव फाउंडेशन से सालों से जुड़ी हैं और इस फाउंडेशन की मेडिकल ड्राइव को लीड कर रही हैं. अपने अनुभवों से ऋतु बताती हैं कि जब हमारे साथ कोई हादसा होता है तो उससे लड़ने की हिम्मत वहीं से आती है. हमें बाहर हिम्मत तलाशने की जरूरत नहीं होती, वो ताकत हमारे अंदर ही होती है.

 

नदिया की रहने वाली मौसमी बताती है कि उनके पति ने उनका साथ छोड़ दिया था लेकिन उनके माता पिता ने कभी नहीं छोड़ा. इसलिए हादसे के बाद से उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी और ठान लिया कि वे अपना जीवन गर्व के साथ जीएंगी, मन से कभी नहीं हारेंगी

ऐसी ही प्रेरणादायी सच्ची स्टोरीज के लिए पढ़ते रहें सफरनामा- http://anuprerna.blogspot.com/

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