#TuesdayMotivation- आ गया 'स्व में स्थित' होने का समय

अब समय आ गया है स्व में स्थित होने का। अब और वक्त नहीं है कि हम किसी और को देखें या किसी और के जीवन से खुद की तुलना करें। वक्त कठीन है और अपने आप को तैयार करना बहुत जरूरी है। सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी। चारों ओर निराशा, दुख और अशांति का माहौल है, ऐसे में हमें आशा की थोड़ी सी किरण अपने ही अंदर से ढूंढनी पड़ेगी। इसके लिए बहुत जरूरी है स्व में स्थित होने की। जब तक हम स्व में स्थित नहीं होंगे तब तक बाहरी किसी भी परिस्थिति से लड़ नहीं पाएंगे। क्योंकि बाहर की परिस्थितियां हमपर हावी होकर हमें कमजोर बना रही हैं, लेकिन अगर हम कमजोर बन गए तो आगे कैसे लड़ पाएंगे। अभी तो बस चीटियों की मौत हो रही है, दुखों के पहाड़ तो गिरने बाकी हैं। ऐसे में अगर हम अभी से छोटे -छोटे हालातों से घबराकर टूट जाएंगे तो आगे की राह कैसे तय करेंगे। 

बाहरी दुनिया में तो बहुत हलचल है, लेकिन आपके अंदर एक ठहराव होना चाहिए। चारों तरफ सब कुछ हिल रहा है लेकिन आपको स्थिर रहना है। ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि जब हर कोई दुख और हताशा से घिरा हुआ है उसमें ये सकारात्मक नजरिया और जीवन जीने की कला बड़ी ही बेमानी सी लगती है। लेकिन सच ये भी है कि आपको ऐसा ही होना पड़ेगा। वरना इस दुनिया में खुदको सहजकर रखना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए अपनी तैयारी आज से शुरू कर दें। स्व में स्थित हो जाएं। आप सोच रहे होंगे कि आखिर इसका मतलब क्या है। 

बाहरी दुनिया से खुदको डीटैच करके अपने अंदर की दुनिया में स्थिति हो जाना। शांत, स्थिर और धैर्य़वान। बाहर जो भी हो रहा है वो आपके वश में नहीं है, उसे आप शायद रोक भी नहीं सकते लेकिन जो आपके अंदर चल रहा है उसपर आपका नियंत्रण है। इसलिए कम से कम उसपर ध्यान दें और कोशिश करें कुछ ऐसा सोचने की जो आपको जीने की रोशनी दे। जैसे अंधेरे में एक दीया जल उठता है। ये तभी संभव हो पाएगा जब आप अपने आप से बात करेंगे और अंर्तमुखी होंगे। अपने अंदर झांककर अपनी कमी कमजोरियों को निकालकर एक नए स्व का निर्माण करेंगे। बाहर लोगों को देखते देखते हम खुद को देखना भूल जाते हैं। हमें अपने ही अंदर जाकर बैठना होगा तभी हम अंदर से वो हिम्मत जूटा पाएंगे,जिसके आधार पर हम कोई भी समस्या हल कर पाएंगे। जिंदगी को देखने का एक अलग ही नजरिय पैदा कर पाएंगे। इसे ही कहते हैं स्व में स्थित में होना। 

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