#MenstrualHygieneDay : शर्म से नहीं, गर्व से जीने की है जरूरत

#MenstrualHygieneDay मतलब हम लड़कियों के लिए बहुत बड़ा दिनक्योंकि हमें गर्व है कि हमें पीरियड्स होते हैं। हम संपूर्ण हैं। लेकिन इस दिन के बारे में ना ही कोई बात होती है ना ही कोई चर्चा। कोई और दिन होता तो सेलेब्रेशन के मैसेज्स आने लगते। इनफेक्ट अधिकतर लड़कियों से पूछा जाए कि क्या उन्हें पता भी है कि ऐसा कोई दिन भी होता है। तो वे इससे अंजान होंगी। 

अपने अधिकार की सबसे बड़ी लड़ाई है खुद को पहले औरत समझो। जो आप में है उसे स्वीकार करोफिर दुनिया उसे स्वीकार करेगी। हम कौन सी दुनिया में जी रहे हैंजहां पीरयड्स को आज भी एक टैबू ही माना जाता है। ये एक गुनाह की तरह हैलड़कियां कैसे इसके बारे में बात कर सकती हैं। यहां तक हाईजीन पर कैसे अपने कलिग्स से डिस्कस कर सकती हैं। शर्म नहीं आती। घरस्कूलकॉलेजसमाज और फिर आफिस इस सफर में पीरियड साथ-साथ चलता है। जरूरत है तो बस इसे शर्म से नहीं गर्व से जीने की। 

चलिए अपने पुराने दिन की याद ताजा करती हूं। मुझे जब पहली बार दसवीं में पीरियड्स आए थेमैं एकदम से रोने लगीगांव की स्कूल में पढ़ती थीलगा जैसे जीवन में अंधेरा सा हो गया। मां-चाची दोनों आपस में बात करने लगींजैसे क्या खता हो गई मुझसे। सब खत्म सा हो गया। चाची ने बहुत समझाया और एक कोने में बिठा दिया। लगा जैसे चार दिन तक जिदंगी ने दम ही तोड़ दिया था। ऐसी ही हर महीने जब पीरियड्स आते थे चार दिन तक सब कुछ थम सा जाता था। क्योंकि ज्वाइंट फैमिली थीचाचा-चाचीदादी-दादाबड़े लोग सबके सामने नहीं जा सकती थी। अलग बैठना हैनल नहीं छूनाकिचन और पूजा घर तो देखना तक नहीं है। दादी खूब सुनाती थी। एक कोने में पटक देती थी। खाना भी दूर से दे दिया जाता था। मैं बड़ी होती गई और कॉलेज खत्म करके गांव से निकल गई आगे की पढाई के लिए लेकिन बाद की जेनरेशन की जिंदगी भी ऐसे ही नर्क बनी रही।   

बदलाव तब आया जब मैं बाहर से आई और घर के दकियानुशी नियमों की मैंने धज्जियां उड़ाई। दादी फिर भी चिल्लाती रही लेकिन मैंने नल भी छू लिया और एक कोने में जाकर खाना नहीं खाया। हर किसी के सामने आई और कहा हां मुझे पीरियड्स हैं। आज जब सालों बाद मैं कुछ बनकर घर लौटी हूं तब चाची-चाचा दादा-दादी पापा मां सब वहीं हैं। लेकिन सोच काफी बदल गई है। दादी नल छूने पर अब कुछ नहीं कहती। बस पूजा और किचन में रोक टोक रखती हैं। वक्त के साथ सब बदलता है। अगर आप हिम्मत का एक कदम उठाएं और ये जानते हुए कि आप सही हैं तो सालों के ये दकियानुशी नियमों का खात्मा कर सकेंगे। 

 

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