Covid 19- क्या आपको भी फोन की घंटी बजते ही डर लगता है ?

आजकल हर दिन की शुरुआत कुछ ऐसे ही होती है- जैसे किसी का फोन आता है या फिर सोशल मीडिया के जरिए खबर मिलती है कि हमारे किसी अपने ने अपने ही किसी बहुत करीबी को खो दिया। फोन की घंटी बजते ही डर लगने लगता है जैसे पता नहीं अब क्या खबर आएगी। पता नहीं किस घड़ी कोई अपना दम तोड़ दे और हम बेबस लाचार बस उसके जाने की खबर सुनते हैं। हर दिन जैसे एक डर और दहशत के साथ गुजर रहा है। जिससे भी बात करते हैं वो बस कोविड से जुड़ी कोई खबर सुनाता है या ये बताता है कि कैसे उसका परिवार कोविड से जंग लड़ रहा है। 

ऐसा लग रहा है जैसे हम सभी एक ही कस्ती में सवार हैं। हममें से कोई अलग नहीं है। हर किसी का दर्द और पीड़ा जैसे एक जैसी है। दूर से भी अगर किसी का फोन आता है, या कोई जानने वाले की भी मौत की खबर आती है तो दिल सहम उठता है। ऐसा लगता है जैसे हम सब एक ही परिवार के हैं। हमने अपने ही किसी को खो दिया है। हाल ही में मेरे जानने वाले या यूं कहें कई करीबियों ने अपने करीबियों को खोया दिया है और जब मुझे मालूम चला तो लगा जैसे मैंने ही किसी अपने को खोया है। किसी और की मां या भाई बहन अपने ही भाई-बहन या माता पिता जैसे लगते हैं। शायद ये जज्बात आपके दिल में भी उमर रहे होंगे। आप भी इसी दौर से गुजर रहे होंगे। 

दरअसल, जीवन यही है। किसी और की पीड़ा को महसूस करना। हम इस दौड़ भाग की जिंदगी में इस एहसास से कहीं दूर चले गए थे। जब किसी और के दुख में हम दुखी हो जाएं। लेकिन इस कोविड ने हमें इंसानियत से मिलाया है। देश के जिस भी कोने, शहर,गांव जहां से भी खबर आ रही है लगता है हम उनके साथ हैं, वो हमारे अपने हैं। हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं, कहीं जा नहीं सकते। उनकी मदद नहीं कर सकते हैं,लेकिन एक काम कर सकते हैं-उनके लिए दुआ कर सकते हैं। घर पर बैठकर हम उन हजारों लाखों लोगों को हिम्मत की वाइव्रेशन भेज सकते हैं। वो कहते हैं ना संकल्प से सृष्टि बनती है। अगर हजारों लोग मिलकर हिम्मत की वाइव्रेशन उन तक पहुंचाएंगे जो इस वक्त जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं तो कहीं ना कहीं आपकी दुआ काम आएगी। 

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