बिस्तर पर थी मधुमिता की लाश
वर्ष 2003 में हुए मधुमिता हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोपी अमरनाथ त्रिपाठी उत्तर प्रदेश में एक कद्दावर नेता रहे हैं। 58 साल के अमरमणि फिलहाल मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
कौन थी मधुमिता
मधुमिता गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली एक नवोदित कवयित्री थी, जिसकी 22 साल की उम्र में लखनऊ स्थित उसके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना मई 2003 की है। हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि मधुमिता ने अपने कोख में पल रहे अमरमणि त्रिपाठी के बच्चे को गिराने से इन्कार कर दिया था। हत्या के वक्त मधुमिता गर्भवती थी। डीएनए टेस्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि मधुमिता के पेट में पल रहा बच्चा त्रिपाठी का है और अमरमणि ने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर मधुमिता की हत्या की थी। इस मामले में उनकी पत्नी को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
कैसे हुआ कत्ल
सीबीआई ने अपनी चार्ज शीट में दर्ज किया है कि 9 मई 2003 को शूटर संतोष राय और प्रकाश पाण्डेय एक बाइक से मधुमिता के पेपर मिल कालोनी, लखनऊ स्थित घर के बाहर पहुंचे। घर पर मधुमिता और नौकर देशराज थे। दोनों मधुमिता के घर के अंदर दाखिल हुए। जब नौकर देशराज चाय बनाने के लिए किचन में गया तभी फायरिंग की आवाज आई। देशराज मधुमिता के कमरे की तरफ भागा लेकिन वहां न तो संतोष था और न ही प्रकाश पाण्डेय। बिस्तर पर मधुमिता की लाश पड़ी थी।
क्यों मारा मधुमिता को
जाहिर है मधुमिता को गोली संतोष राय और प्रकाश पाण्डेय ने मारी। किसके कहने पर? यह जांच का विषय बना। सीबीआई ने जब अमरमणि और उसके सहयोगियों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराया तो अवैध रिश्तों की कहानी सामने आई। सत्ता के मद में चूर अमरमणि को शेरो शायरी का शौक था। यहीं उसकी मुलाकात एक जलसे में मधुमिता से हुई। अमर मणि ने दबाव बनाकर मधुमिता का दो बार एबॉर्शन कराया लेकिन तीसरी बार वो अड़ गई और यही उसकी मौत का कारण बन गया। अमर मणि के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बने वो तोहफे जो उसने मधुमिता को दिए थे। इसके अलावा ट्रेन के टिकटों और हवाई यात्राओं के ब्यौरे से ये साफ हो गया कि अमरमणि ने मधुमिता का इस्तेमाल मौज मस्ती के लिए किया।
अय्याशी का खेल खत्म
मधुमिता हत्याकांड के दौरान अमरमणि त्रिपाठी बसपा सरकार के कैबिनेट मंत्री थे। हत्याकांड पर बवाल मचने के बाद मायावती ने त्रिपाठी को न सिर्फ सरकार और पार्टी से रुखसत कर दिया था बल्कि इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द भी कर दिया था। जांच में त्रिपाठी को दोषी पाया गया था, लेकिन जब से अखिलेश यादव ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली है, तब से त्रिपाठी सजा सिर्फ कागजों पर काट रहे हैं नाकि असल जिंदगी में।
जेल में हैं, लेकिन नहीं भी
सही मायने में देखा जाए तो वे आजाद हैं। पिछले तीन महीने से हर दोपहर पुलिस की एक गाड़ी त्रिपाठी को लेने जेल में आती है क्योंकि त्रिपाठी की मां की मौत के बाद से ही उनकी तबीयत खराब रहने लगी थी। इसलिए प्रशासन उन्हें इलाज के लिए जेल से निकाल ले आती है। ऊपर से इसका मकसद होता है उन्हें इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जाना। लगभग इसी समय त्रिपाठी का निजी वाहन भी जेल पहुंच जाता है। जेल से बाहर निकलने के बाद त्रिपाठी पुलिस की गाड़ी में नहीं बल्कि अपनी आरामदेह गाड़ी में सवार होते हैं। पुलिस वाहन उनके पीछे चलता है। गाड़ी बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचती है जहां त्रिपाठी एक प्राइवेट लक्जरी रूम में भर्ती होते हैं। इसके बाद अगले कई घंटों तक इस कमरे में एक दरबार लगता है। इसमें उनके गैंग के सदस्य और समर्थक भी होते हैं। रोज की इस पंचायत में त्रिपाठी शिकायतें सुनते हैं, फोन लगाते हैं, अफसरों को चि_ियां लिखते हैं, प्रॉपर्टी के सौदों का मोलभाव करते हैं, जमीन के झगड़ों में मध्यस्थता करते हैं और अपने गैंग के साथ बैठक भी करते हैं। शाम को उन्हें फिर जेल पहुंचा दिया जाता है ताकि उम्र कैद का दिखावा जारी रखा जा सके। उम्रकैद का मतलब है आजीवन कैद, लेकिन व्यवहार में देखा जाए तो कोई अपराधी 14 साल के बाद अपनी रिहाई के लिए अपील कर सकता है जो ज्यादातर मौकों पर मंजूर भी हो जाता है। बहुमत पाई समाजवादी पार्टी की सरकार का कार्यकाल 2017 में पूरा होना है।
अपराधी अमरमणि का सफरनामा
त्रिपाठी का पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक व्यवस्थित अपराध सिंडीकेट है। उनका रिकॉर्ड खंगालने पर तीन दर्जन से भी ज्यादा मामलों के बारे में पता चलता है जिनमें उन पर हत्या, फिरौती वसूलने, अपहरण, हत्या की कोशिश जैसे संगीन आरोप रहे हैं। मधुमिता हत्याकांड की सीबीआई जांच से पहले किसी भी स्थानीय अदालत में उनके खिलाफ कोई फैसला नहीं हो पाया था। इन मामलों में अक्सर गवाह या तो बयान से मुकर जाते या फिर सबूत गायब हो जाते थे। केस स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से चले, यह सुनिश्चित करने के लिए फरवरी, 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि मधुमिता हत्याकांड की जांच एक विशेष सीबीआई जज द्वारा देहरादून में की जाए। यही नहीं बल्कि मधुमिता की बहन निधी शुक्ला ने इस मामले में एक याचिका दायर कर यूपी सरकार से अपील की थी कि मधुमिता केस को देहरादून की अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए। निधी को शक था कि अमरमणि त्रिपाठी एक राजनैतिक प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण वह कभी भी केस को प्रभावित कर सकता है। त्रिपाठी के गढ़ गोरखपुर से 800 किमी दूर है, लेकिन जहां सुप्रीम कोर्ट ने न्याय की प्रक्रिया में त्रिपाठी को एक खतरा माना वहीं 2007 के चुनावों में समाजवादी पार्टी ने उन्हें महाराजगंज जिले की लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया था। त्रिपाठी ने जेल से ही चुनाव लड़ा और 20,000 वोट से जीत गए। इसके छह महीने बाद अक्टूबर, 2007 में देहरादून स्थित अदालत ने उन्हें मधुमिता शुक्ला हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुना दी। मायावती के पांच साल के शासनकाल के दौरान त्रिपाठी देहरादून जेल हे। जून, 2011 में अदालत ने उन्हें उनकी मां के अंतिम संस्कार के लिए गोरखपुर आने की इजाजत दे दी। बताया जाता है कि अंतिम संस्कार के दौरान बीमारी का बहाना बनाकर वे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गए। अस्पताल के कुछ अधिकारियों की मदद के चलते वे दो महीने से भी ज्यादा समय तक अस्पताल में रहने में सफल हो गए। जब यह बात प्रकाश में आई तो मायावती सरकार ने वापस उन्हें देहरादून जेल में भेज दिया। यही नहीं, इस मामले में एक पुलिस इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई। इसके साथ ही यह भी आदेश हुआ कि उन डॉक्टरों के खिलाफ जांच हो जिन्होंने त्रिपाठी को उनके मन मुताबिक मेडिकल रिपोर्टें दीं, लेकिन 15 मार्च को एक तरफ अखिलेश सूबे के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे थे और दूसरी ओर त्रिपाठी को देहरादून से गोरखपुर डिविजनल जेल ले लाया जा रहा था। यादव प्रभुत्व वाली समाजवादी पार्टी में त्रिपाठी एक अहम ब्राह्मïण नेता हैं। चूंकि उन पर आपराधिक आरोप साबित हो चुके थे, इसलिए वे कोई चुनाव नहीं लड़ सकते थे। ऐसे में सपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी को महाराजगंज जिले की ही नौतनवा सीट से टिकट दे दिया, लेकिन माना यही जा रहा था कि असली उम्मीदवार तो अमरमणि त्रिपाठी ही हैं। उन्होंने जेल से ही एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने वोटरों से उनके बेटे को वोट देने की अपील की थी। वीडियो में उन्होंने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनाए और गिराए हैं। वोटरों से वे कह रहे थे कि उन्होंने हमेशा अपने लोगों की रक्षा की और अब उनकी बारी है कि वे इसका बदला चुकाएं और उनके सम्मान की रक्षा करें।


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