#Spirituality आध्यात्म धर्म नहीं, धारणा है

आध्यात्म, शब्द सुनकर भारी सा लगता है। ऐसा जैसे यह तो बुजुर्गों की संपत्ति है। हम युवाओं को इससे क्या नाता। अभी तो उम्र है जीने की, इनकी नजर में आध्यात्म जीवन का रस छीन लेता है, जैसे किसी के बारे में गलत शब्द बोलने की आजादी खो जाती है, निंदा, अपमान और घृणा नहीं कर पाते, किसी को छोटा नहीं दिखा पाते। दरअसल, युवा नहीं, कुछ लोगों की अगर बात करें तो वे सोचते हैं कि आध्यात्मिकता सीख ली तो संयम आ जाएगा और संयम किसी को पसंद कहां आता है। 

चलिए मैं आपको खुलकर समझाती हूं क्योंकि मैं रोजाना ऐसे ही कुछ लोगों के संपर्क में आती हूं। इनसे अगर आध्यात्म की बात करो तो कहते हैं ये इनका विषय नहीं है। या फिर अपनी किसी हरकत से साबित कर देते हैं कि इन्हें आध्यात्म के रू-ब-रू तक नहीं आना। लेकिन ये नहीं समझते कि आध्यात्म किसी धर्म को नहीं दर्शाता, बल्कि जीवन में आप क्या धारण करते हैं, इसे सिखाता है। इसमें कोई संन्यास लेकर पहाड़ों पर जाकर बसना नहीं है। आध्यात्म आत्माओं को उनकी पहचान कराता है। हमारे अंदर की सारी खूबियों और शक्तियों की परख देता है। आध्यात्म मतलब हर दिन आप कैसे और क्या सोचते हैं, कैसा व्यवहार करते हैं और जीवन को किस दिशा में लेकर चलते हैं। आध्यात्म हर किसी को बड़ा दिखाना और अपमानित न करना है।

लेकिन ये इनके वश में इसलिए नहीं है क्योंकि रोजाना ये किसी ना किसी को छोटा दिखाते हैं, अपमान करते हैं, निंदा और हंसी मजाक बनाते हैं। अगर ये सब नहीं करते तो इनका दिन अधूरा रह जाता है। तो इसलिए इनके लिए आध्यात्म की यात्रा कठिन है। इस शब्द के मायने तक इन्हें समझ नहीं आते। 

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