#CityMorning हर शहर सुबह एक जैसा लगता है

मुझे लगता है हर शहर रोजाना एक ही तरह से उठता है। वही, छत पर अखबार गिरने की आवाज, नीचे साइकिल पर काम पर जाते लोग, घरों में काम करने वाली दिदियां, घर के बाहर खड़ी गाड़ियां साफ करते लोग, पार्क में टहलते बुजुर्ग और युवा, किचन से आती चाय की खुशबू, पौधों को सींचती महिलाएं, स्कूल जाने के लिए तैयार बच्चे। ऐसी तस्वीर लगभग हर शहर, कस्बे में एक ही जैसी होती है। हां, हालांकि गांव में इसका नजारा थोड़ा अलग नजर आता है।

हम आज स्कूल जाते बच्चों को देखकर अपना बचपन याद करने वाली कुछ बातें याद करते हैं। कोई बच्चा बस में जा रहा है तो कोई रिक्शे पर, किसी को उसके पेरेंट्स गाड़ी में ले जा रहे हैं तो किसी को स्कूटी पर। सुबह सड़कें ऐसे ही बच्चों से भरी होती है। कई बच्चे अपनी मां का हाथ पकड़कर सड़क पार करते हैं तो कुछ अकेले भी जाते हुए दिखते हैं। इन दृश्य में एक बात कामन है, बच्चों के चेहरे की मुस्कुराहट। उन्हें देखकर अच्छा लगता है और अपने आप मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है। आज कुछ ऐसा ही हुआ, एक बच्ची अपने पापा से कह रही थी पापा मैंने कल 3 बजे तक पढ़ाई की और आज स्कूल से आकर मैं बस थोड़ा सा रेस्ट करूंगी और फिर इंग्लिश पढ़ूंगी। मुझे इतना अच्छा लगा सुनकर जैसे पहले बच्चे पढ़ाई की बातें किया करते थे लेकिन आजकल तस्वीर कुछ बदल गई है। खैर, हम बात कर रहे थे बच्चों के स्कूल जाने वाले टाइम की। अलग अलग तरह के बच्चे दिख रहे थे, तमाम सपने आंखों में संजोकर। बड़े होकर कोई इंजीनियर बनेगा तो कोई डाक्टर, कोई टीचर तो कोई अफसर। उनके साथ-साथ माता पिता भी बड़े सपने देखते हैं।  

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