#Udaan: अंधेरे की दुनिया

लॉकडाउन के दौरान डिजिटल पढाई तो शुरू हो गई लेकिन क्या ये पढ़ाई सभी बच्चों तक पहुंच पाई। ऑनलाइन शिक्षा तो दूर कुछ बच्चों ने तो स्कूल का चेहरा भी ठीक से नहीं देखा है। भारत के ही हजारों बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल जाने के लिए तरस रहे हैं, लेकिन उन्हें वो माहौल नहीं मिल पा रहा है। बंगाल के एक छोटे से गांव की ये कड़वी सच्चाई है, यहां बच्चे घरों में काम ज्यादा करते हैं स्कूल कम जाते हैं। जिन हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उन्हीं हाथों में 4-5 साल की उम्र से ही बरतन थमा दिए जाते हैं। 100 से भी ज्यादा बच्चे इन्हीं अंधेरों में अपना जीवन बिता रहे हैं। किसी के माता-पिता नहीं है तो कोई अपने रिश्तेदारों के यहां पलकर बड़े हो रहे हैं। ऐसे में आम बच्चों की तरह अपने जीवन की कल्पना करना इनके लिए आसान नहीं है।

ये सिर्फ बंगाल के इस एक गांव की सच्चाई नहीं है बल्कि देश में ऐसे कितने गांव हैं जहां हजारों बच्चे ऐसे ही बगैर किसी सपने के जी रहे हैं। इस गांव में एक छोटा सा स्कूल है लेकिन या तो वो स्कूल खुलता नहीं या फिर आधे वक्त उसमें पढ़ाई नहीं होती। कुछ बच्चे स्कूल जाते तो हैं लेकिन बगैर किसी मकसद के। इसी गांव के कुछ बच्चे ऐसे हैं जो बड़े होकर पुलिस या डाक्टर भी बनना चाहते हैं। वे भी बड़े सपने देखते हैं। कुछ बच्चे खेल में आगे हैं तो कुछ पढ़ाई में। एक 5 साल की बच्ची है पॉली। पॉली अपनी नानी के साथ रहती है क्योंकि उसके माता-पिता नहीं हैं। मैं बड़ी होकर पुलिस बनना चाहती हूं। 

पैसे न होने की वजह से कुछ बच्चों को दूसरों के घरों में काम तक करना पडता है। क्या इन बच्चों को एक सुनहरा भविष्य नहीं मिलना चाहिए, ये पढ़ाई से पहले अपने घर का पेट पालना चाहते हैं। ये बच्चे बहुत ही होनहार हैं। लेकिन शिक्षा का माहौल न मिलने की वजह से इनकी दुनिया में अंधेरा सा है। आईए एक छोटी सी पहल करें और कम से एक बच्चे की जिंदगी को रोशन करें। 

https://youtu.be/7u-SKHS861Y


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