#SaveWater : पानी ना भरके मरने के बजाए पानी भरते समय मरते हैं तो बेहतर

देश का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली में रहता है जहां लोग पानी को सस्ते में खर्च करते हैं और बहाते हैं, व्लर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के बावजूद कि 2020 तक दिल्ली में पानी की त्रासदी आ सकती है, पानी का स्तर खत्म हो रहा है। लोग धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल नहीं इसको बर्बाद कर रहे हैं। केवल अगर दिल्ली की बात करें तो गलत होगा पूरे देश में ही पानी का य़ुद्ध होने वाला है। ऐसे में देश का एक शहर महाराष्ट्र भी है,जहां ऐसे कितने गांव हैं वहां पानी की बूंद के लिए जिंदगी की जंग लड़नी पड़ती है। लातूर का नाम तो आपने सुना ही होगा।

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हर साल गर्मियों में कम से लातूर खबरों में आता है पानी की त्रासदी की वजह से। गर्मी खत्म होते ही इसकी जिक्र भी बंद हो जाता है। इस बार भी कोई अलग तस्वीर नहीं है। लातूर के पास एक गांव है सोनवति। इस गांव में एक भी कूआं ऐसा नहीं है जिसमें पानी है। हर कूआं सूख गया है। केवल एक कूएं में पानी है और वो भी 60 फिट नीचे। इस कूएं के अंदर कितने किलोमीटर दूर से लोग चलकर आते हैं पानी लेने। पहाड़ जैसे लगता है इसके अंदर चढ़ना। सीढ़ियां चढ़कर पानी के छोटे से स्रोत से पत्ता लगाकर पानी भरना और फिर उसे बालटी में डालना। ये बहुत ही मुश्किल है क्योंकि पांच घन्टे में एक बालटी भरती है। आप समझ रहे हैं, पूरा दिन निकल जाता है दो बाल्टी भरने में। यहां सरकारी टैंकर नहीं पहुंचते हैं।

य़े एक ऐसा गांव नहीं है वहां, लातूर के पास ऐसे कई गांव हैं जहां एक बूंद पानी की लड़ाई जिंदगी की लड़ाई है। लोग पूरे दिन मिलों तक चलकर जाते हैं लेकिन पानी केवल एक बालटी ही ला पाते हैं। ये कितनी दुखद तस्वीर है। सूखे से पानी की प्यास से हर साल हजारों अपनी जान गंवाते हैं, लेकिन हम जैसे लोग जो शहरों में बैठे हैं उन्हें इस बात का इल्म तक नहीं है। वे बिंदास पानी बर्बाद करते हैं। किचन, खेत, पार्क, पौधे, घरों में लॉन में पानी ऐसे बहता है जैसे दो कौड़ी की कोई चीज हो।

पानी ना भरके मरने के बजाए पानी भरते समय मरते हैं तो बेहतर है ऐसा हम नहीं लेकिन एक बूढ़ी मां कह रही है। जो रोजाना पानी लेने गांव के उस कूएं में जाती है। उसके घर में कोई नहीं है। ऐसे में अपनी जान बचाने के लिए ही अपनी जान जोखिम में डालती है वो। कितनी दर्दनाक तस्वीर है ये। पानी जिंदगी के लिए सबसे जरूरी है और उसके लिए ही सबसे बड़ी जंग लड़नी पड़ती है। क्योंकि उस कूएं में उतरने में जान का बहुत खतरा है। कभी भी पैर फिसल सकता है। लेकिन लोग वहां जाते हैं अपने बच्चे परिबार के लिए दो बूंद पानी इकट्ठा करने। क्यों इतना बेजार तस्वीर है एक ही देश की। 

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