वर्ष 2020 में नहीं रहेगा फेसबुक का अस्तित्व
दुनियाभर में लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अगले पांच से आठ साल में गायब हो जाएगी। यह चौंकाने वाली बात है, लेकिन स्टॉक मार्केट में फेसबुक की साख गिरने के बाद वित्त प्रबंधक ऐसी भविष्यवाणी कर चुके हैं। उनकी मानें तो फेसबुक भी याहू की तर्ज पर पतन की ओर बढ़ रही है और वर्ष 2020 तक इसका सफाया हो जाएगा।
इरोनफायर कैपिटल कंपनी के संस्थापक इरिक जैक्सन का कहना है,'याहू में 13 हजार कर्मी काम कर रहे हैं। यह अब भी पैसा कमा रही है और इस समय भी लाभ में है, लेकिन यहवर्ष 2000 का 10 प्रतिशत मात्र है।Ó उन्होंने कहा कि इंटरनेट कंपनियों की तीन पीढ़ी बाजार में आ चुकी है। पहली पीढ़ी में वेब पोर्टल्स आते हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण याहू है। दूसरी पीढ़ी में फेसबुक जैसी कंपनियां आती हैं, जिन्होंने सोशल नेटवर्किंग का जाल फैलाया। मगर तीसरी पीढ़ी मोबाइल इन पर भारी पडऩे वाली है।
फेसबुक के लुप्त होने के दावे ने इस सप्ताह ऑनलाइन दुनिया में धमाल मचाया। यदि यह भविष्यवाणी सही होती है तो उद्योग विश्लेषकों को हैरानी नहीं होगी। विश्लेषकों का कहना है कि फेसबुक के फरवरी के आइपीओ के मुताबिक दिसंबर, 2011 तक इस साइट के करीब 42 करोड़ 50 लाख मासिक मोबाइल यूजर्स हैं। यह संख्या विश्व में इसके कुल यूजर्स की लगभग आधी है। यह संख्या बहुत प्रभावी लग सकती है, लेकिन इनसे फेसबुक को कोई आय नहीं होती है। अपने मोबाइल यूजर्स को संतुष्ट नहीं कर पाने की चिंता को दूर करने के लिए फेसबुक ने स्मार्टफोन पर फोटो शेयरिंग के लिए मशहूर एप्लीकेशन इंस्टाग्राम को एक अरब डालर [करीब 55 अरब रुपये] में खरीदा है। जैक्सन का मानना है कि सोशल नेटवर्क के इस कदम के बावजूद भी मोबाइल यूजर्स को लेकर उसकी चिंता बनी रहेगी।
इन कारणों से फेसबुक होगी लुप्त
-स्टॉक मार्केट में कदम रखते ही लोगों के विश्वास में कमी केचलते शेयर के दामों में भारी गिरावट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्टॉक मार्केट में 38 डॉलर [करीब 2109 रुपये] से शुरू हुए फेसबुक की कीमत अब 25.87 डॉलर [करीब 1435 रुपये] रह गई है। इसकेबाद फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की छवि भी खराब हुई है। जुकरबर्ग पर अपने दोस्तों और करीबियों को धोखा देने के आरोप पहले ही लग चुकेहैं।
-इंटरनेट विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा मोबाइल है।
-विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर में जिस तेजी से मोबाइल यूजर्स बढ़े हैं, फेसबुक का प्रसार भी उसी रफ्तार से हो रहा है। मगर मार्क जुकरबर्ग इस उपलब्धि को भुना नहीं पाए हैं। वह मोबाइल अनुरूप फेसबुक को ढाल नहीं पा रहे हैं।
-फेसबुक यूजर्स की निजी और गोपनीय जानकारियों के लीक होने की खबरों के चलते भी यूजर्स इससे दूरी बना सकते हैं।


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