एक साथ दस लक्ष्य भेदने में सक्षम है अग्नि-5

अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 की मारक क्षमता अद्वितीय है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारत इंटर कांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल [आईसीबीएम] क्लब में शुमार हो गया है। इससे पूर्व, इस क्लब में अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस शामिल थे। इसमें कोई दो मत नहीं कि आज के इस असाधारण मिसाइल परीक्षण के बाद रक्षा क्षेत्र में भारत का कद काफी ऊंचा हो गया है।
आईसीबीएम की मिसाइलों में उच्च स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इन तकनीकों में से एक तकनीक है एमआईआरवी [मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल]। एमआईआरवी तकनीक के जरिए मिसाइल को पृथ्वी से अंतरिक्ष तक का सफर तय करने में मदद मिलती है। यही नहीं, अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापस आने में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। अग्नि 5 इस्तेमाल की गई तकनीक के जरिए यह मिसाइल पहले पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर निकलकर वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है। इस तरह से यह मिसाइल ना केवल दुश्मन के निगाह से बची रहती है बल्कि दुश्मनों के उपग्र्रहों से भी पकड़ में नहीं आती।

पहली बार कब हुआ था एमआईआरवी का इस्तेमाल

-बताया जाता है कि 1970 में पहली बार अमेरिका ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया था, इसके बाद 1975 में रूस ने इसका प्रयोग किया था। गौरतलब है कि रूस ने प्रति मिसाइल वारहेड में वेपंस की संख्या 6 रखी थी, वहीं रूस ने वारहेड में 10 परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया था।

लेकिन भारत ने मिसाइल के वारहेड में 3 परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक के प्रयोग से अग्नि-5 एक साथ कई निशाने लगा सकता है।

इसकी विशेषता यह है कि इस मिसाइल में इस्तेमाल की गई तकनीक अमरीका जैसे देशों की मिसाइलों में उपयोग होने वाली तकनीक से भी बेहतर है। अग्नि 5 की तकनीकों में समग्र रॉकेट मोटर, माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम [एमआईएनडीएस] शामिल है।

अग्नि तीन 3500 किलोमीटर की रेंज वाली टू स्टेज इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल थी और अब अग्नि 5 में तीसरा छोटा स्टेज जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही अग्नि 5 का वजन भी कम रखा गया है। यानी इसका डिजाइन ऐसा है कि यह उससे 1500 किलोमीटर ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है।

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