निर्भया रेप: हां, हम बदल गए हैं, पहले बोलते थे और अब सुनते भी नहीं हैं...
हम बदल गए हैं, हां, सचमुच हम बदल गए हैं। तभी तो इतने साल बाद दिल्ली में निर्भया जैसी घटना होने के बाद हम चुप हैं। आपने ध्यान दिया जब निर्भया की घटना हुई थी उस वक्त ऐसा लगा जैसे पूरा देश क्यों विश्व भी चिल्ला चिल्लाकर न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन चंद रोज पहले दिल्ली से ग्रेटर नोएडा जा रही बस में एक बच्ची के साथ बलात्कार हुआ, उस खाली बस को घसीटकर ले जाया गया और लड़की के साथ जघन्य अपराध किया। मैं एक पत्रकार हूं लेकिन आपको यकीन नहीं होगा मुझे खुद शर्म आ रही है यह कहते हुए कि मीडिया में बस नाम भर की इस खबर को दिखाया गया। जैसे बस बताने के लिए बता रहे हैं, कोई जानकारी दे रहे हैं। आज करीबन एक हफ्ता हो गया, मैं रोज सर्च करती हूं कि कहीं तो कोई जोर शोर से इसपर बात होगी लेकिन नहीं। किसी नेता, किसी सोशल मीडिया हैंडल या फिर महान व्यक्तियों के मुंह में एक शब्द नहीं है। दूसरे मुद्दे जो जरूरी हैं। वंदेमातरम पर हल्ला बोल या ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारी या फिर मनोरंजन की खबरें। इन सब से किसी को फुर्सत नहीं है। हम भी वैसे ही हो गए हैं, हां, हम बदल चुके हैं, यह है बदलाव के संकेत। कल तक सड़कों पर आग लगा दी गई थी, रायसीना हील्स को हिला दिया गया था, लेकिन आज वही युवा जेन जी बिल्कुल खामोश है। जैसे कुछ हुआ ही नहीं है...और वैसे जेन जी खूब हल्ला करती है।


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