#LockdownDiary- जिंदगी की दो अलग अलग तस्वीर

आज पार्क में टहलते टहलते दो अलग-अलग दृश्य देखकर दिल सोचने पर मजबूर हो गया। एक तस्वीर कुछ ऐसी थी जब एक गर्भवती महिला पार्क के किसी कोने में जाकर पेशाब कर रही थी, वो बहुत ही नाजुक हालत में थी और साथ में करीब 3 साल की एक बच्ची भी थी। उसके कपड़े आधे फटे थे और वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। पार्क में काफी भीड़ थी लेकिन उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि उसे कोई देख भी रहा है। मैं काफी देर खड़ी होकर उसे देखती रही और सोचती रही। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं आगे जाकर उससे क्या कहूं। जिंदगी कितनी बेबस और लाचार होती है। 

               दोनों कहानियों से जुड़ी असली तस्वीर दिखाना लाजमी नहीं था                   

दूसरी तस्वीर उसके थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि एक बुजुर्ग दिव्यांग हैं और उनकी उम्र 70 साल से कम नहीं होगी, लाठियों के सहारे चलते हैं वो बिंदास चेयर पर बैठकर बिड़ी पी रहे हैं। पहले मैंने उन्हें चुपचाप बैठे हुए देखा,तो मुझे लगा जैसे जिंदगी ने इनके साथ भी बेहसी की है शायद। लेकिन फिर देखा  कि वे आराम से बिड़ी पी रहे हैं। मुझे देखकर बहुत अच्छा लगा, ऐसा जैसे उन्हें जिंदगी से शिकायत नहीं और वो जिंदगी का कश ले रहे हैं। एक जिंदगी ऐसी भी जो दिव्यांग होकर भी अपने पैरों पर दौड़ रही है। 

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