बस जल्द खत्म हो जाए ये Corona साल

हर साल हम साल खत्म होने से पहले ये जरूर कहते हैं कि अरे यार ये साल इतनी जल्दी क्यों चला गया, साल इतनी जल्दी कैसे खत्म हो गया। लेकिन इस साल हम ऐसा नहीं कह रहे हैं। हर किसी की जुबान पर बस यही बात है कि ये साल बस जल्दी से बीत जाए..हर कोई बस साल खत्म होने का इंतजार कर रहा है। ऐसा भी नहीं है कि लोग इस साल को शानदार जश्न के साथ विदा करना चाहते हैं, बल्कि नम आंखों से इस साल की विदाई चाहते हैं। ऐसे जैसे कोई बोझ उतर रहा हो, और लंबी सदियों जैसा बीता हो ये साल। आपको अंदाजा लग ही गया होगा कि मैं किस बारे में बात कर रही हूं। जी हां, मैं कोरोना साल की बात कर रही हूं। 

इस साल को लोगों ने कोरोना साल का नाम दिया है। कोरोना वायरस ने मार्च महीने में भारत में दस्तक दी और फिर कोहराम मचा दिया। सुनने में ये छोटा सा शब्द था और एक छोटा सा वायरस भी। लेकिन इस छोटे से वायरस ने दुनिया में तबाही मचा दी। पहले इस वायरस ने लोगों के तन पर कब्जा किया, फिर मन पर और फिर पूरी जिंदगी पर। इस वायरस ने लोगों की जिंदगी छिनी, उनकी नौकरी और उनके अपने भी। किसी को शहर छोड़ना पड़ा तो किसी को दर दर भटकना पड़ा। लंबे समय तक लोग घरों में बंद रहे। लॉकडाउन की ऐसी तस्वीर के बारे में तो किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। कितने लोगों को तो खाने के लिेए भी मोहताज होना पड़ा तो कितनों को राशन बचाकर खाना पड़ा। कितनों का काम बंद हो गया तो कितने लोग सड़क पर आ गए। एक वायरस लेकिन दांव पर लाखों जिंदगियां। बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया, पार्क में खेलना बंद कर दिया। बच्चों का बचपन जैसे उनसे छीन गया। मजदूरों को शहर छोड़कर पैदल अपने घर की ओर जाना पड़ा। जिंदगी ने एक अलग मोड़ ले लिया। 

साल खत्म होने को है और इस वायरस का खतरा कम-ज्यादा बना हुआ है। जिंदगियां अब भी पटरी पर नहीं लौटी है। लेकिन फिर भी एक उम्मीद दिखाई दे रही है। हर किसी की आंखों में एक आस है कि नया साल आते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। हमारी जिंदगी में छाया हुआ ये अंधेरा मिट जाएगा। चलिए इसी उम्मीद के साथ हम नए साल का आगाज करें।  

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