Lockdown Diary: आप जिंदा हैं ये बहुत बड़ी बात है, You are alive
लॉकडॉउन के दूसरे फेज का अंत हुआ और तीसरा फेज शुरू हो गया। लो जी अब फिर से माइंड सेट कर लो आखिर रहना कैसे है। आई मीन एक ही तरह से रहना है या थोड़ा चेंज करके देखते हैं। जैसे पिछले लगभग ड़ेढ महीने गुजरे हैं वैसे ही क्या ये आने वाले 15 दिन भी गुजारने हैं। डर में, आलस में,या सच में जीकर गुजारने हैं। हमें एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है जब से हम घर पर हैं। ये इतिहास में पहली बार हुआ है जब सब कुछ रुक गया है लेकिन एक चीज नहीं रुकी है, हमारे नकारात्मक सोचने की आदत नहीं रुकी है।
दरअसल, मैं आपसे ज्यादा ज्ञान की बात नहीं करूंगी बस एक अनुभव साझा करूंगी आप इस Blog का मकसद समझ आएंगे। मैं एक महीने से बिस्तर पर थी, ना कुछ कर पा रही थी और ना ही सोच पा रही थी। अब मैं काफी बेहतर हूं और अपने सारे काम खुद कर रही हूं,तो मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं जिंदा तो हूं। मतलब हम इतनी बड़ी बात महसूस नहीं कर पाते हैं। जो है जितना है, है या नहीं है, सुख है गम है, खाना-पीना कुछ भी है ज्यादा है कम है। लेकिन आप हैं तो सब है।
मतलब आप सांस ले रहे हैं रोजाना, आप जिंदा हैं। आपके हाथ पैर चल रहे हैं। बस बहुत है। ये खुदा की सबसे बड़ी मेहर है और आपके इसके लिए रोजाना शुक्रगुजार होना होगा। अगला पल आपको नहीं पता आप सांस ले पाएंगे या नहीं, जो है बस ये एक छोटा सा पल है। आप समझ रहे हैं ये कितनी बड़ी बात है। क्योंकि हजारों ऐसे हैं जिनकी जिंदगी का भरोसा नहीं, कोई अस्पताल में है तो कोई कहीं ओर। कल का सूरज देख पाएंगे या नहीं कोई पता नहीं। ऐसे में आप कितने लकी हैं। you are alive
मतलब आप सांस ले रहे हैं रोजाना, आप जिंदा हैं। आपके हाथ पैर चल रहे हैं। बस बहुत है। ये खुदा की सबसे बड़ी मेहर है और आपके इसके लिए रोजाना शुक्रगुजार होना होगा। अगला पल आपको नहीं पता आप सांस ले पाएंगे या नहीं, जो है बस ये एक छोटा सा पल है। आप समझ रहे हैं ये कितनी बड़ी बात है। क्योंकि हजारों ऐसे हैं जिनकी जिंदगी का भरोसा नहीं, कोई अस्पताल में है तो कोई कहीं ओर। कल का सूरज देख पाएंगे या नहीं कोई पता नहीं। ऐसे में आप कितने लकी हैं। you are alive


Sans hai to sab hai
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