#RIPLegend: जिंदगी की कोई Script नहीं होती,हम बस किरदार निभाते हैं...
आज सच में कुछ अच्छा सी नहीं लग रहा। मौत तो एक सच्चाई है और सिनेमा के पर्दे से हमारा नाता बस फिल्म के मनोरंजन भर का ही होता है, लेकिन फिर क्यों कल इरफान और आज ऋषि कपूर के जाने ने मन को अंदर से झंझोरा। कई सवाल पैदा हुए, जज्बातों के अंबार बाहर निकले।
सच में जिंदगी की कोई स्क्रिप्ट नहीं होती और होती तो हम लिख भी नहीं सकते थे। क्योंकि जिंदगी की कहानी तो वो उपर बैठकर लिखता है, हमें बस बगैर कहानी जाने अपना किरदार निभाना होता है। जी हां, कुछ ऐसा ही लग रहा है आजकल। दो दिनों के भीतर दो बेहद ही जिंदादिल और जिंदगी से प्यार करने वाले इंसानों ने इस दुनिया को अलविदा कहा। इनका जाना हमें कुछ सच्चाईयों से रू-ब-रू जरूर करा गया। अगर हम उन्हें देखना चाहें तो, मौत एक ऐसी सच्चाई है जो हमारी बंद आंखे भी खोल देती है। किसी और की मौत देखकर हम दोबारा जीना सीख जाते हैं, पल भर के लिए जिंदगी किमती लगने लगती है, सारे गिले शिकवे भूलकर सभी को गले लगाने का दिल करने लगता है। लेकिन ये सब ख्याल पर भर के लिए ही आते हैं बस, फिर से हम उसी जद्दोजहद में चले जाते हैं। उसी नफरत भरी नजरों से दुनिया की ओर देखने लगते हैं।
जिंदगी वैसे तो किसी के हाथ में नहीं होती, लेकिन जब तक होती है तब तक उसे एक प्रयोगशाला समझकर जी लेना चाहिए। जब खुशियां हैं तब भी जी लो, नहीं है तब भी उसी जज्बे के साथ जियो। आपके पास कितने भी पैसे हो, कितनी शोहरत या नाम हो, कई बार ये कुछ भी काम नहीं आता है। सब बेइमाना बन जाता है, आप हार जाते हैं,। इरफान हार गए, ऋषि कपूर हार गए। कई जगह भागे इलाज कराया लेकिन जिंदगी ने आखिर दम तोड़ दिया। लेकिन जब तक जिये मस्त होकर जिये। जिंदगी को जिंदगी की तरह जिये। उनकी जिंदगी का सफर अगर देखें तो आज एक मिसाल जैसा लगता है, सभी के आंखे नम हैं। सब के दिल से आवाज निकलती है जैसे कोई अपना बिछड़ गया हो। लौट आओ दोस्त। दोनों का सफर कुछ ऐसा ही रहा।
भले ही ऋषि कपूर हमेशा से ही एक अच्छे परिवार से थे, लेकिन इरफान उनके पास कुछ भी नहीं था, उस दौर में भी वे बिंदास रहते थे। क्या ऐसे इंसानों को ही ऐसी बीमारियां होती हैं। ऐसे इंसान लोगों के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं, जब जीवन रहता है तो जीना सीखाते हैं और सांसे रुकने के बाद जिंदगी की सच्चाई से रू-ब-रू कराते हैं।



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